रिश्ते की एहमियत और ज़िम्मेदारियों का एहसास दिलाता भिटोली

Posted By Sumati Rawat
Posted On: March 26, 2026


भिटोली शब्द का अर्थ होता है- भेंट या मुलाकात जो इस परंपरा की भावना को दर्शाती है। भिटोली उत्तराखंड, राज्य की एक प्रसिद्ध और भवनात्मक लोकपरंपरा है, जो विशेषर कुमाऊं, गढ़वाल छेत्रो माई मनई जाति है। यह त्यौहार हर वर्ष हिंदू पंचांग के चेत्र माह (मार्च-अप्रैल) में आता है। यहां मुख्यरूप से भाई-बहन के प्रेम को मजबूत बनाने के लिए जाना जाता है।

भिटोली हमें दरशाता है कि भले जीवन में कितनी भी दूर क्यों न आ जाए, रिश्तों का महत्व कभी कम नहीं होना चाहिए। इस परंपरा के अनुसर भाई अपनी बहन से मिलने के लिए उसके ससुराल जाता है साथ ही वहां अपनी बहन को उपहार भी देता है, यहां उपहार केवल एक वस्तु नहीं होती, बाल्की उनके भाई का स्नेह, चिंता और जिम्मेदारी भी छिपी होती है, यहां परंपरा बहन को एहसास कराती है कि उसका मायका हमेशा उसका साथ है और वह कभी अकेली नहीं है।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जहां हर कोई व्यवस्था है वही यहां त्यौहार रिश्ते को पास लाने का काम करती है, साथ ही यहां हमें याद दिलाता है कि रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए समय, प्यार और ध्यान देना कितना जरूरी है।

पहले के समय में पहाड़ी चेत्रो में यात्रा और संपर्क के साधन बहुत कम थे। शादी के बाद बेटियां लंबे समय तक अपने मायके नहीं आ पाती थी, इसलिए साल में एक बार उनका हाल चाल जाने के लिए उनसे मिलने के लिए यहां परंपरा शुरू हुई
आधुनिक समय में भले ही जीवन शैली बदल गई हो। लोग अब सेहरो में रहने लगे हैं और अब डिजिटल भी हो गई है। अब लोग फोन, वीडियो कॉल और ऑनलाइन के मध्यम से भी पैसे या उपहार भेज कर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हैं, हलाकि जो खुशी इंतजार और सामने से मिलकर होती है वहा खुशी डिजिटल में नहीं मिलेगी।

यहां पर्व हमें सिखाता है कि रिश्ते में केवल अधिकार ही नहीं बल्कि उन जिम्मेदारों को निभाना भी कितना जरूरी है